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पश्चिम बंगाल एसटीएफ का बड़ा एक्शन: ‘हनी-ट्रैप’ और जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, झारखंड से महिला गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल एसटीएफ का बड़ा एक्शन: 'हनी-ट्रैप' और जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, झारखंड से महिला गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल एसटीएफ का बड़ा एक्शन: 'हनी-ट्रैप' और जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़, झारखंड से महिला गिरफ्तार

कोलकाता — पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े सीमा पार आतंकी और जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के एक संदिग्ध गुर्गे की गिरफ्तारी के बाद, एसटीएफ ने इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ते हुए झारखंड के साहिबगंज से एक 22 वर्षीय महिला को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एक ऐसे संगठित सिंडिकेट की ओर इशारा करती है, जिसे कथित तौर पर पाकिस्तान स्थित आकाओं (handlers) द्वारा संचालित किया जा रहा था। इस नेटवर्क का उद्देश्य भारतीय सीमा के भीतर जासूसी करना, हनी-ट्रैप के जरिए वीआईपी (VIP) नेताओं की संवेदनशील जानकारी जुटाना और विध्वंसक गतिविधियों को अंजाम देना था।

झारखंड से गिरफ्तार की गई महिला की पहचान अर्पिता सरकार के रूप में हुई है। उसे शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को साहिबगंज जिले के बरहरवा इलाके से गिरफ्तार किया गया। उसे पुरबा बर्धमान लाया गया है, जहां उसे स्थानीय अदालत में पेश किया जाना है। अर्पिता की यह गिरफ्तारी 24 वर्षीय मोहम्मद हमीम मंडल को हिरासत में लिए जाने के ठीक बाद हुई है। हमीम मंडल को एसटीएफ ने गुरुवार को बर्धमान शहर के एक हाउसिंग कॉम्प्लेक्स स्थित उसके किराए के फ्लैट से गिरफ्तार किया था।

‘हनी-ट्रैप’ और सोशल मीडिया के जरिए बिछाया जाल

एसटीएफ के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, हमीम मंडल और अर्पिता सरकार की गिरफ्तारी से एक बेहद खतरनाक जासूसी नेटवर्क की ब्लूप्रिंट सामने आई है। जांचकर्ताओं का आरोप है कि अर्पिता सरकार को पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स द्वारा “हनी-ट्रैप” (honey-trap) ऑपरेशंस के लिए तैयार किया जा रहा था।

झारखंड के एक मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाली अर्पिता के पिता किराने की दुकान चलाते हैं। एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, अर्पिता सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय थी और एक इन्फ्लुएंसर (influencer) तथा मॉडल बनना चाहती थी। वह अक्सर मोटरसाइकिल चलाते हुए अपनी तस्वीरें और वीडियो ऑनलाइन पोस्ट करती थी।

सूत्रों का कहना है कि हमीम मंडल और उसके विदेशी आकाओं ने अर्पिता की इसी सोशल मीडिया उपस्थिति और महत्वाकांक्षा का फायदा उठाने की कोशिश की। एसटीएफ के एक अधिकारी ने बताया, “वह (अर्पिता) अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए राज्य के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, राजनेताओं और उनके सचिवों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही थी ताकि संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जा सके।” यह भी दावा किया गया है कि अर्पिता को इस तरह के हनी-ट्रैप अभियानों और वीआईपी संपर्कों को फंसाने के लिए बाकायदा “प्रशिक्षण” मिल रहा था।

हाई-प्रोफाइल टार्गेट और अपहरण की साजिश

इस नेटवर्क के खुलासे से कई चौंकाने वाली साजिशें भी सामने आई हैं। एसटीएफ के महानिरीक्षक (IG) गौरव शर्मा के अनुसार, हमीम मंडल को कथित तौर पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सुरक्षा में खामियां तलाशने के लिए उनकी गतिविधियों (movements) पर नज़र रखने का काम सौंपा गया था। इसके अलावा, वह अन्य राजनेताओं और कई पुलिस अधिकारियों को भी निशाना बना रहा था।

एसटीएफ की जांच में यह भी सामने आया है कि हमीम मंडल और अर्पिता सरकार ने हावड़ा के एक राज्य मंत्री के बेटे को हनी-ट्रैप में फंसाकर उसका अपहरण करने और उसके परिवार से भारी रकम वसूलने की साजिश रची थी। दरअसल, इसी अपहरण की साजिश से जुड़ी खुफिया जानकारी मिलने के बाद ही ये दोनों पुलिस के रडार पर आए थे।

आईजी शर्मा ने बताया कि मंडल के इरादे केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं थे। उन्होंने कहा, “पाकिस्तानी संगठन उसे पुलिस की वर्दी की व्यवस्था करने और दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में हुए ‘कॉकक्रोच जनता पार्टी’ (CJP) के छात्र विरोध प्रदर्शन में घुसपैठ कर हिंसा भड़काने के लिए कह रहे थे।”

एनक्रिप्टेड मैसेजिंग और पाकिस्तानी हैंडलर

इस जांच का एक सबसे अहम पहलू यह है कि ये आरोपी अपने आकाओं से बातचीत के लिए बेहद अत्याधुनिक और एनक्रिप्टेड (encrypted) मैसेजिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल कर रहे थे।

एसटीएफ अधिकारियों ने खुलासा किया कि हमीम और अर्पिता जिन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर रहे थे, उन्हें चलाने के लिए मोबाइल सिम कार्ड की जरूरत नहीं होती है। ये ऐप किसी विशिष्ट सर्वर पर डेटा स्टोर नहीं करते, जिससे सुरक्षा एजेंसियों के लिए इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

हालांकि, दोनों के व्हाट्सएप (WhatsApp) चैट्स और जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (लैपटॉप, मोबाइल फोन) की जांच के दौरान कई पाकिस्तानी हैंडलर्स के नाम सामने आए हैं। पूछताछ में राणा, उज़ैर, आबिद जट्ट और हमद जैसे नाम उभरे हैं। एसटीएफ को संदेह है कि इन व्यक्तियों के तार पाकिस्तान स्थित शहज़ाद भट्टी गैंग और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) से जुड़े हुए हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भट्टी का नेटवर्क सीमा पार से नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी में शामिल रहा है, और नशीले पदार्थों के व्यापार से होने वाली आय का इस्तेमाल आईएसआई के समर्थन से भारत में आतंकी गतिविधियों के वित्तपोषण (terror financing) के लिए किया जाता है।

आरोपियों की पृष्ठभूमि

मुख्य संदिग्ध हमीम मंडल का पुश्तैनी घर पुरबा बर्धमान जिले के मोंतेश्वर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के दीर्घानगर गांव में है। उसके पिता मुनीरुद्दीन काम के सिलसिले में 1998 से हावड़ा के पिलखाना इलाके में रह रहे हैं। हमीम और उसका परिवार हाल ही में बर्धमान के उस किराए के फ्लैट में शिफ्ट हुआ था जहां से उसे गिरफ्तार किया गया। पुलिस का मानना है कि हमीम ने एक छात्र और हावड़ा में लेबल-प्रिंटिंग का छोटा व्यवसाय चलाने वाले व्यक्ति की आड़ में आतंकी संगठनों के साथ गहरे संबंध बना लिए थे।

एसटीएफ द्वारा दर्ज की गई आधिकारिक शिकायत में कहा गया है कि मंडल “सीमा पार आपराधिक और जासूसी नेटवर्क का सदस्य था… जो स्थानीय गुर्गों की भर्ती, हथियारों की खरीद, गणमान्य व्यक्तियों की संवेदनशील जानकारी जुटाने, हनी-ट्रैपिंग, अपहरण और हत्याओं में शामिल था।”

आगे की जांच और अलर्ट

इस दोहरी गिरफ्तारी के बाद पश्चिम बंगाल प्रशासन पूरी तरह से हाई अलर्ट पर है। यह मामला राज्य के लिए एक बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता बन गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे “अत्यंत संवेदनशील” बताते हुए कहा, “यह सिर्फ मेरी सुरक्षा के बारे में नहीं है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है। इसके अंतरराष्ट्रीय लिंक हैं।”

एसटीएफ अब इस पूरे मॉड्यूल की गहराई से जांच कर रही है। बैंक खातों के लेनदेन का विश्लेषण किया जा रहा है और एनक्रिप्टेड संदेशों को डिकोड (decode) करने की कोशिश की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस नेटवर्क द्वारा जुटाए गए डेटा का इस्तेमाल भविष्य के किन आतंकी हमलों के लिए किया जाना था। हमीम मंडल को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है, और आने वाले दिनों में पूछताछ के दौरान सीमा पार आतंकवाद और घरेलू जासूसी को लेकर कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

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