नई दिल्ली — भारतीय कुश्ती और खेल जगत को हिलाकर रख देने वाले एक बहुचर्चित और कानूनी रूप से जटिल मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को छह महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न और आपराधिक धमकी के आरोपों से पूरी तरह बरी (Acquit) कर दिया है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) अश्वनी पंवार ने बंद कमरे में फैसला सुनाते हुए बृजभूषण शरण सिंह के साथ-साथ मामले में सह-आरोपी रहे कुश्ती महासंघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। इस फैसले के साथ ही देश के शीर्ष एथलीटों द्वारा शुरू किए गए और तीन साल से अधिक समय तक चले एक बड़े विवाद पर फिलहाल के लिए कानूनी मुहर लग गई है।
कोर्ट का फैसला और सुनवाई की प्रक्रिया
यह मामला 2023 में तब तूल पकड़ा था जब भारत की प्रतिष्ठित महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर अपने कार्यकाल के दौरान यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की गहन जांच के बाद 15 जून 2023 को लगभग 1,500 पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट अदालत में दाखिल की थी।
चार्जशीट में बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे:
- धारा 354: महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग।
- धारा 354A: यौन उत्पीड़न और अवांछित शारीरिक संपर्क।
- धारा 354D: पीछा करना (Stalking)।
- धारा 506(1): आपराधिक धमकी देना।
लंबी सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने पीड़ित पहलवानों का पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव मोहन, रेहान खान और ऋषभ भाटी ने दलीलें दीं। अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) के सदस्यों और जांच अधिकारी के बयानों का गहन अध्ययन करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सार्वजनिक किया गया।
नोट: इससे पहले एक नाबालिग पहलवान द्वारा लगाए गए आरोपों के मामले में भी दिल्ली पुलिस की कैंसिलेशन रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार कर लिया था, क्योंकि शिकायतकर्ता ने अपने बयान वापस ले लिए थे।
फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह की प्रतिक्रिया
अदालत से बरी होने के बाद मीडिया से बात करते हुए बृजभूषण शरण सिंह काफी आश्वस्त और भावुक नजर आए। उन्होंने शुरू से ही खुद को निर्दोष बताए जाने के अपने रुख को दोहराया और न्यायपालिका के प्रति आभार व्यक्त किया।
“मैंने पहले ही दिन कहा था कि अगर मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप सच साबित होते हैं, तो मैं खुद को फांसी लगा लूंगा। आज मुझे अदालत ने पूरी तरह बरी कर दिया है। यह मेरे और मेरे करोड़ों समर्थकों के लिए अत्यंत खुशी और संतोष का दिन है। मुझे देश की न्याय व्यवस्था पर हमेशा से पूरा भरोसा था।”
— बृजभूषण शरण सिंह, पूर्व WFI अध्यक्ष
उन्होंने आगे कहा कि वे अदालत के विस्तृत और लिखित आदेश का अध्ययन करेंगे और उसके बाद ही इस कानूनी प्रक्रिया से जुड़े अन्य पहलुओं पर कोई विस्तृत टिप्पणी करेंगे।
जंतर-मंतर का ऐतिहासिक आंदोलन और विवाद का दौर
इस मामले का असर सिर्फ अदालत के कमरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरे देश के खेल ढांचे और राजनीति को झकझोर कर रख दिया था। शुरुआती वर्ष 2023 में भारत के सबसे सफल और सम्मानित पहलवानों—जिनमें ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक, बजरंग पुनिया और विश्व चैंपियन पदक विजेता विनेश फोगाट शामिल थे—ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया था।
| घटनाक्रम का चरण | मुख्य बिंदु और प्रभाव |
| धरना प्रदर्शन | जंतर-मंतर पर महीनों चला विरोध प्रदर्शन, खेल पुरस्कार लौटाने का ऐलान। |
| संसद मार्च व पुलिस कार्रवाई | नए संसद भवन के उद्घाटन के दिन पहलवानों का मार्च, पुलिस द्वारा हिरासत में लिया जाना। |
| अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया | यूनाईटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग। |
| प्रशासनिक बदलाव | WFI की कार्यकारिणी को निलंबित करना और तदर्थ समिति का गठन। |
पहलवानों की मांग थी कि बृजभूषण शरण सिंह को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और भारतीय कुश्ती महासंघ की कमान किसी गैर-राजनीतिक व निष्पक्ष व्यक्ति को सौंपी जाए। इस आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान भी खींचा था, खासकर तब जब पुलिस बल द्वारा प्रदर्शनकारी एथलीटों को हटाने के दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
विनेश फोगाट का खुलासा और राजनीतिक माहौल
हाल के दिनों में, स्टार पहलवान विनेश फोगाट ने अपनी गोपनीयता हटाते हुए सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया था कि वे उन छह शिकायतकर्ता महिलाओं में से एक थीं। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत पहचान छिपाने के कारण उन्होंने अब तक अपना नाम उजागर नहीं किया था। विनेश फोगाट और अन्य पहलवानों ने आरोप लगाया था कि बरी होने की प्रक्रिया से पहले भी कुश्ती महासंघ पर बृजभूषण के करीबियों का ही नियंत्रण रहा है, जिससे खिलाड़ियों के लिए निष्पक्ष माहौल बनना मुश्किल हो गया था।
राजनीतिक दृष्टिकोण से, बृजभूषण शरण सिंह उत्तर प्रदेश के कैसरगंज और गोंडा क्षेत्र से छह बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। हालांकि 2024 के आम चुनावों में भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया था, लेकिन उनके बेटे करण भूषण सिंह को कैसरगंज से चुनावी मैदान में उतारा गया था, जिन्होंने जीत हासिल की। विपक्षी दलों ने इस फैसले को ‘परोक्ष राजनीति’ (Proxy Politics) करार देते हुए सरकार पर गंभीर निशाना साधा था।
भारतीय कुश्ती के लिए आगे का रास्ता
राउज एवेन्यू कोर्ट के इस फैसले से बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी कानूनी राहत जरूर मिली है, लेकिन भारतीय कुश्ती जगत में पड़ा विभाजन इतनी जल्दी भरता नजर नहीं आता। प्रदर्शनकारी पहलवानों और उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने पहले ही संकेत दिए थे कि वे अदालत के किसी भी फैसले का कानूनी अध्ययन करेंगे और जरूरत पड़ने पर ऊपरी अदालत में अपील करने के विकल्प पर विचार कर सकते हैं।
यह फैसला भारत में खेल संघों के संचालन, खिलाड़ियों की सुरक्षा नीतियों और एथलीटों व प्रशासकों के बीच के संबंधों पर एक दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ेगा। खेल प्रेमियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस ऐतिहासिक फैसले के बाद भारतीय कुश्ती महासंघ अपनी खोई हुई साख को वापस पाने और खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए क्या कदम उठाता है।
